PM Awas Yojana List 2026: नाम कैसे चेक करें, किस्त कब आएगी, पूरी जानकारी एक जगह
आपने भी फॉर्म भरा था, और अब हर दूसरे दिन मोबाइल में AwaasSoft की वेबसाइट खोलकर लिस्ट देखते हैं। नाम नहीं मिल रहा, या मिल गया है तो किस्त नहीं आ रही। यही सवाल इस वक्त लाखों गांव वालों के मन में घूम रहा है।
सच कहें तो PM Awas Yojana Gramin List 2026 को समझना उतना उलझा हुआ नहीं है, जितना ऊपर से लगता है। बस दिक्कत यह है कि सही जानकारी बिखरी हुई है — कुछ पोर्टल पर, कुछ पंचायत सचिव के पास, कुछ BDO ऑफिस की फाइल में।
इस लेख में वही सब एक जगह मिलेगा। नाम चेक करने का तरीका, दस्तावेज़ की लिस्ट, किस्त का हिसाब, और पैसा अटकने पर क्या करना है — सब कुछ, स्टेप दर स्टेप।
विषय-सूची
- PM Awas Yojana 2026 में क्या नया है
- योजना असल में है क्या
- पात्रता और अपात्रता की पूरी शर्तें
- आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
- PMAY List 2026 में नाम कैसे देखें
- Beneficiary ID कैसे निकालें
- AwaasSoft से लिस्ट डाउनलोड करने का तरीका
- PFMS से पैसा ट्रैक करना
- पहली, दूसरी और तीसरी किस्त कब मिलती है
- पैसा नहीं आया तो क्या करें
- आवेदन रिजेक्ट क्यों होता है
- शिकायत कैसे दर्ज करें
- हेल्पलाइन नंबर और जरूरी लिंक
- एक आम मामला, जो लगभग हर गांव में दोहराता है
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
PM Awas Yojana 2026 में क्या नया है?
2024 में सरकार ने इस योजना को नए सिरे से बढ़ाया। कैबिनेट ने PMAY-G को फिर से मंजूरी दी, इस बार 2024-25 से लेकर 2028-29 तक के लिए, और लक्ष्य रखा गया दो करोड़ नए घरों का। इसके पीछे करीब तीन लाख छह हजार करोड़ रुपये का बजट रखा गया।
पेच यहाँ फँसता है — पुरानी लिस्ट 2011 की जनगणना पर बनी थी। बहुत सारे परिवार तब छूट गए थे, या उनकी हालत बाद में बिगड़ी। इसी कमी को पूरा करने के लिए सितंबर 2024 में Awaas Plus सर्वे शुरू हुआ, ताकि छूटे हुए परिवार अब नई लिस्ट में जुड़ सकें।
एक बात और जान लीजिए — पात्रता की शर्तें भी थोड़ी नरम हुई हैं। पहले महीने की आमदनी दस हजार रुपये से ज्यादा होने पर बाहर कर दिया जाता था, अब यह सीमा बढ़ाकर पंद्रह हजार कर दी गई है। मोटरसाइकिल या फ्रिज रखने वाले परिवार भी अब बाहर नहीं होंगे, जो पहले अपात्रता की वजह मानी जाती थी।
PMAY-G योजना असल में है क्या?
सीधी भाषा में कहें तो, यह केंद्र सरकार की वह स्कीम है जिसके तहत गांव में कच्चे या टूटे-फूटे घर में रहने वाले परिवार को पक्का मकान बनाने के लिए सीधे पैसा मिलता है। न कोई एजेंट, न कोई बिचौलिया — पैसा सीधे बैंक खाते में आता है।
मैदानी इलाकों में कुल सहायता एक लाख बीस हजार रुपये तक होती है। पहाड़ी, आदिवासी और मुश्किल भौगोलिक इलाकों में यह राशि बढ़कर एक लाख तीस हजार रुपये तक जाती है। इसके ऊपर स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाने के लिए अलग से भी सहायता जोड़ी जाती है, और मनरेगा से मजदूरी के दिन भी जुड़ सकते हैं अगर परिवार के पास जॉब कार्ड है।
लाभार्थी का चुनाव खुद-ब-खुद नहीं होता। यह पूरी तरह सरकारी सर्वे डेटा — SECC 2011 और अब Awaas Plus 2024 — पर टिका है, फिर ग्राम सभा उसे सत्यापित और मंजूर करती है।
पात्रता और अपात्रता की पूरी शर्तें
यहाँ थोड़ा ध्यान से पढ़िए, क्योंकि ज्यादातर नाम इसी वजह से लिस्ट से बाहर रह जाते हैं।
कौन अपने-आप शामिल हो जाता है:
- वो परिवार जिनके पास कोई पक्का घर नहीं है
- बेघर परिवार, या कच्ची-टूटी झोपड़ी में रहने वाले
- घर में कोई भी 16 से 59 साल का सक्षम पुरुष सदस्य नहीं है
- महिला मुखिया वाला परिवार, जिसमें कोई सक्षम पुरुष सदस्य नहीं
- SC, ST और अल्पसंख्यक वर्ग के गरीब परिवार, जो अन्य शर्तें भी पूरी करते हों
कौन बाहर हो जाता है:
| अपात्रता की वजह | विवरण |
|---|---|
| पक्का घर पहले से है | 2 या 3 कमरों वाला पक्का मकान पहले से मौजूद |
| मोटर चालित तिपहिया/चौपहिया वाहन | परिवार में कोई सदस्य मालिक हो |
| सरकारी नौकरी | परिवार का कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी हो |
| इनकम टैक्स भरता है | परिवार में कोई सदस्य आयकरदाता हो |
| ज्यादा सिंचित जमीन | ढाई हेक्टेयर से ज्यादा सिंचित भूमि हो |
| किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा ज्यादा | पचास हजार से ऊपर की लिमिट पर पात्रता प्रभावित हो सकती है |
अगर आसान शब्दों में कहें तो, यह योजना उन परिवारों के लिए बनी है जो असल में बेघर हैं या टूटे-फूटे घर में गुजारा कर रहे हैं, आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं। जिनके पास पहले से कोई साधन-संपन्नता के निशान हैं, उन्हें बाहर रखा जाता है।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
फॉर्म भरने से पहले ये कागज़ात तैयार रखिए, वरना पंचायत ऑफिस के तीन-चार चक्कर लग जाएंगे।
- आधार कार्ड, परिवार के हर सदस्य का
- बैंक पासबुक, और खाता आधार से लिंक होना जरूरी है
- मनरेगा जॉब कार्ड, अगर बना हुआ है
- राशन कार्ड
- SECC या Awaas Plus सर्वे में दर्ज जानकारी
- जाति प्रमाण पत्र, अगर SC/ST श्रेणी में आवेदन कर रहे हैं
- मोबाइल नंबर, जो आधार से लिंक हो, OTP के लिए
असल में सबसे ज्यादा दिक्कत आधार-बैंक लिंकिंग में आती है। बहुत से लोगों का खाता आधार से जुड़ा तो होता है, पर NPCI मैपिंग नहीं होती। ऊपर से देखने में दोनों एक जैसे लगते हैं, पर सरकारी सिस्टम में यह अलग चीज़ है। बैंक जाकर यह जरूर पूछें कि "DBT के लिए NPCI लिंक है या नहीं।"
PMAY List 2026 में नाम कैसे देखें?
अब सवाल यह उठता है कि नाम कहां और कैसे ढूंढें। तरीका सीधा है, बस स्टेप मिस मत कीजिए।
- pmayg.nic.in वेबसाइट खोलें
- ऊपर मेन्यू में "Stakeholders" पर क्लिक करें
- वहां से "IAY/PMAYG Beneficiary" चुनें
- अपना 12 अंकों का रजिस्ट्रेशन नंबर डालें, या आधार नंबर से सर्च करें
- अगर रजिस्ट्रेशन नंबर याद नहीं, तो "Advanced Search" खोलें और राज्य, जिला, ब्लॉक, पंचायत चुनते हुए अपने गांव तक पहुंचें
- कैप्चा भरकर सबमिट करें, लिस्ट खुल जाएगी
गूगल प्ले स्टोर से AwaasApp भी डाउनलोड कर सकते हैं। इसमें फोटो के साथ लाभार्थी की जानकारी दिखती है, और घर बनने की प्रगति भी वहीं दिख जाती है।
लेकिन ठहराव यहाँ आता है — कई बार सर्वर डाउन मिलता है, खासकर शाम के वक्त जब गांव-गांव से लोग एक साथ लिस्ट चेक करते हैं। ऐसे में सुबह के वक्त कोशिश करना बेहतर रहता है, या रात दस बजे के बाद।
Beneficiary ID कैसे निकालें?
Beneficiary ID वही 12 अंकों का रजिस्ट्रेशन नंबर है, जो आवेदन के वक्त जनरेट होता है। अगर यह नंबर आपके पास नहीं है, तो तीन तरीके से निकाल सकते हैं:
- ग्राम पंचायत सचिव या रोजगार सेवक से पूछें, उनके पास पूरी पंचायत की सूची रहती है
- pmayg.nic.in पर "Search by Name" ऑप्शन से अपना नाम, पिता का नाम और राज्य-जिला डालकर खोजें
- BDO ऑफिस में लिखित आवेदन देकर मांग सकते हैं
सच कहें तो, यही नंबर आगे की हर प्रक्रिया की चाबी है। इसके बिना न लिस्ट में स्टेटस दिखेगा, न किस्त ट्रैक होगी।
AwaasSoft से लिस्ट डाउनलोड करने का तरीका
AwaasSoft दरअसल वही बैकएंड सिस्टम है जिस पर पूरा PMAY-G डेटा चलता है। इसकी रिपोर्ट्स से पूरे गांव या पंचायत की लिस्ट एक साथ निकल सकती है।
- pmayg.nic.in पर जाएं
- मेन्यू में "Awaassoft" चुनें
- ड्रॉपडाउन में "Reports" पर क्लिक करें
- "Beneficiary Details for Verification" या "Social Audit Reports" जैसे विकल्प में से अपनी जरूरत का रिपोर्ट चुनें
- राज्य, जिला, ब्लॉक, पंचायत भरें, रिपोर्ट खुद-ब-खुद जनरेट होकर स्क्रीन पर आ जाएगी
यह रिपोर्ट PDF में डाउनलोड भी हो जाती है, तो पंचायत मीटिंग में दिखाने के लिए प्रिंट निकालना आसान रहता है।
PFMS से पैसा ट्रैक करना
किस्त आई या नहीं, यह पंचायत से पूछने के बजाय आप खुद PFMS पोर्टल से देख सकते हैं।
- pfms.nic.in खोलें
- "Know Your Payments" ऑप्शन ढूंढें
- अपना बैंक खाता नंबर और बैंक का नाम डालें
- कैप्चा भरें, "Send OTP" दबाएं
- आधार-लिंक्ड मोबाइल पर आया OTP डालकर सबमिट करें
- स्क्रीन पर पेमेंट की पूरी हिस्ट्री दिख जाएगी — कब, कितना, किस मद में आया
UMANG ऐप से भी FTO यानी Fund Transfer Order ट्रैक हो सकता है। रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर "FTO Tracking" में देख सकते हैं कि पैसा किस स्तर पर अटका है — जिला स्तर पर, या ब्लॉक स्तर पर।
एक बात और जान लीजिए — OTP ना आने की शिकायत आम है, खासकर उन इलाकों में जहां नेटवर्क कमजोर है। ऐसे में दो-तीन मिनट रुककर दोबारा "Resend OTP" दबाएं, बार-बार क्लिक करने से अक्सर उल्टा टाइमआउट हो जाता है।
पहली, दूसरी और तीसरी किस्त कब मिलती है?
राशि एक साथ नहीं आती, निर्माण के हर पड़ाव के साथ जुड़ी होती है। मोटे तौर पर पैटर्न ऐसा रहता है:
- पहली किस्त: आवास स्वीकृत होने और जियो-टैगिंग के बाद जारी होती है
- दूसरी किस्त: नींव या प्लिंथ लेवल का काम पूरा होने और निरीक्षण के बाद मिलती है
- तीसरी/अंतिम किस्त: छत का काम पूरा होने या मकान का फाइनल स्टेज पूरा होने पर बाकी बची राशि आती है
अब असली सवाल — रकम कितनी-कितनी बंटती है? यहाँ एक बात साफ कर दूं: यह राज्य-दर-राज्य अलग है, केंद्र सरकार सिर्फ न्यूनतम तीन किस्तों का नियम तय करती है, बाकी बंटवारा राज्य पर छोड़ दिया जाता है। कहीं पहली किस्त ₹40,000 के आसपास मिलती है, दूसरी ₹40,000-₹50,000 के बीच, और तीसरी में बची हुई राशि आती है। कुछ राज्यों में चार किस्तें भी देखी गई हैं — जैसे ₹25,000, फिर ₹40,000-45,000 दो बार, और आखिर में ₹15,000। तो अपने राज्य का सटीक पैटर्न जानने के लिए AwaasSoft पर अपना "Order Sheet Details" जरूर चेक करें — वहीं आपकी असली किस्त राशि साफ दिखेगी।
तीसरी किस्त तभी रिलीज़ होती है जब पंचायत सचिव या इंजीनियर मौके पर जाकर निर्माण पूरा होने की तस्दीक करते हैं। यही वो कदम है जहां सबसे ज्यादा देरी होती है।
PMAY-Urban (शहरी) में किस्त का हिसाब अलग है
एक बात और जान लीजिए — ऊपर जो कुछ बताया, वो पूरी तरह ग्रामीण योजना यानी PMAY-G पर लागू होता है। अगर आप शहरी इलाके में अपनी जमीन पर मकान बना रहे हैं, तो यह PMAY-Urban 2.0 का "Beneficiary-Led Construction" यानी BLC घटक है, और इसका हिसाब-किताब बिल्कुल अलग बैठता है।
शहरी BLC में कुल केंद्रीय सहायता ₹2.5 लाख तक होती है, जो 40:40:20 के अनुपात में तीन किस्तों में आती है:
| किस्त | अनुपात | राशि | कब मिलती है |
|---|---|---|---|
| पहली | 40% | करीब ₹1,00,000 | निर्माण शुरू करने की मंजूरी और पहली स्टेज की जियो-टैगिंग पर |
| दूसरी | 40% | करीब ₹1,00,000 | दीवार लिंटल स्तर तक पहुंचने के सत्यापन पर |
| तीसरी | 20% | करीब ₹50,000 | मकान पूरा होने और अंतिम निरीक्षण के बाद |
होम लोन पर मिलने वाली ब्याज सब्सिडी (ISS वर्टिकल) इससे अलग चीज़ है, वो बैंकों के जरिए अलग तरीके से समायोजित होती है। अगर आप ग्रामीण की जगह शहरी योजना के बारे में पूछ रहे हैं, तो नाम चेक करने का पोर्टल भी बदल जाता है — pmayg.nic.in नहीं, बल्कि pmay-urban.gov.in या pmaymis.gov.in पर जाना होगा।
पैसा नहीं आया तो क्या करें?
नाम लिस्ट में है, स्टेटस भी सही दिख रहा है, पर पैसा खाते में नहीं आया — यह शिकायत सबसे ज्यादा सुनने को मिलती है।
पहले ये तीन चीज़ें खुद जांच लें:
- बैंक खाता आधार से NPCI लिंक है या नहीं — बैंक शाखा में जाकर पासबुक के साथ पूछें
- पिछले चरण का निर्माण-सत्यापन पंचायत स्तर पर हुआ है या अभी बाकी है
- PFMS पर "Know Your Payments" में स्टेटस "Rejected" या "Pending at Bank" तो नहीं दिखा रहा
अगर सब सही है फिर भी पैसा अटका है, तो ग्राम पंचायत सचिव या BDO ऑफिस जाकर लिखित में आवेदन दें, साथ में रजिस्ट्रेशन नंबर और आधार की कॉपी लगाएं। बाबू का चक्कर यहीं शुरू होता है — कई बार फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल घूमती रहती है। ऐसे में लिखित आवेदन की रसीद जरूर लें, ताकि आगे शिकायत में सबूत के तौर पर काम आए।
आवेदन रिजेक्ट क्यों होता है?
रिजेक्शन की वजह अक्सर इनमें से कोई एक होती है:
- SECC डेटा में नाम मौजूद ही नहीं है, और Awaas Plus सर्वे में भी दर्ज नहीं हुआ
- आधार में नाम और बैंक खाते में नाम मेल नहीं खाता
- परिवार के किसी सदस्य के पास पहले से पक्का मकान निकल आया, ग्राम सभा जांच में
- डुप्लीकेट एंट्री — वही परिवार किसी और स्कीम में या पहले से किसी और रजिस्ट्रेशन में दर्ज मिला
अगर आपका नाम बार-बार रिजेक्ट हो रहा है, तो सबसे पहले ग्राम सभा की बैठक में मुद्दा उठाएं, वहीं आपत्ति दर्ज करने का सबसे सीधा रास्ता है। इसके अलावा RTI के जरिए भी BDO से पूछा जा सकता है कि आवेदन किस आधार पर हटाया गया।
शिकायत कैसे दर्ज करें?
तीन रास्ते हैं, हालात के हिसाब से चुन सकते हैं।
टोल-फ्री नंबर: 1800-11-6446 पर कॉल करें, यह चौबीस घंटे चलता है।
CPGRAMS पोर्टल: pgportal.gov.in पर रजिस्ट्रेशन कर के शिकायत दर्ज करें, वहां एक टोकन नंबर मिलेगा — उसे संभालकर रखें, स्टेटस ट्रैक करने के काम आएगा।
ईमेल: support-pmayg@gov.in पर पूरा नाम, आधार नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, मोबाइल नंबर और समस्या का ब्यौरा लिखकर भेजें।
अगर कोई पंचायत सदस्य या अधिकारी पैसे मांग रहा है, या हक मार रहा है, तो जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत देना सबसे मजबूत कदम रहता है। सरकारी नियम कहता है कि शिकायत के 30 दिन के भीतर जवाब देना अनिवार्य है, हालांकि पेचीदा मामलों में यह समय बढ़ भी सकता है।
हेल्पलाइन नंबर और जरूरी लिंक
- आधिकारिक वेबसाइट: pmayg.nic.in
- पेमेंट ट्रैकिंग: pfms.nic.in
- शिकायत पोर्टल: pgportal.gov.in
- टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-11-6446
- ईमेल सहायता: support-pmayg@gov.in
- मोबाइल ऐप: AwaasApp (Google Play Store)
एक आम मामला, जो लगभग हर गांव में दोहराता है
एक जैसा किस्सा अक्सर सुनने को मिलता है। परिवार का आवेदन तो पुराना था, SECC लिस्ट में नाम भी था, पर सालों तक कुछ हिला नहीं। फिर Awaas Plus सर्वे आया, गांव में टीम आई, घर की हालत का फोटो लिया, और नाम नई लिस्ट में जुड़ गया।
पहली किस्त आने में महीना भर लगा। दिक्कत आई दूसरी किस्त पर — निर्माण लिंटल तक पहुंच गया था, पर पंचायत सचिव का सत्यापन दौरा टलता रहा। दो महीने इंतजार के बाद परिवार ने BDO ऑफिस में लिखित शिकायत दी, रसीद ली, और हफ्ते भर में इंजीनियर मौके पर पहुंच गया।
यह पैटर्न लगभग हर जगह एक जैसा दिखता है — पहली किस्त आसानी से आती है, बीच की किस्तें पंचायत-स्तर के सत्यापन में अटकती हैं। यहीं लिखित आवेदन और रसीद का महत्व समझ आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. PM Awas Yojana List 2026 में नाम कब तक अपडेट होती रहेगी?
लिस्ट कोई एक बार जारी होने वाली चीज़ नहीं है। हर वित्तीय वर्ष में, और Awaas Plus सर्वे के आधार पर चरणों में नई एंट्री जुड़ती रहती है।
2. बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के नाम कैसे चेक करें?
pmayg.nic.in पर "Advanced Search" में राज्य, जिला, ब्लॉक और पंचायत चुनकर नाम से खोज सकते हैं।
3. किस्त की राशि हर राज्य में एक जैसी है?
मूल राशि — 1.20 लाख मैदानी और 1.30 लाख पहाड़ी इलाकों में — केंद्र सरकार तय करती है, पर किस्तों का बंटवारा और समय राज्य पर निर्भर करता है, इसलिए AwaasSoft पर अपना Order Sheet जरूर चेक करें।
4. आधार लिंक ना होने पर क्या होगा?
DBT रुक जाएगा। बैंक खाता आधार से NPCI लिंक होना अनिवार्य शर्त है, बिना इसके किस्त खाते में नहीं पहुंचेगी।
5. नाम लिस्ट से अचानक गायब हो जाए तो?
सबसे पहले ग्राम पंचायत सचिव से वजह पूछें। अगर जवाब संतोषजनक ना लगे, तो CPGRAMS पर शिकायत दर्ज करें या BDO से लिखित में स्पष्टीकरण मांगें।
6. शौचालय के लिए अलग पैसा मिलता है?
हां, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत शौचालय निर्माण के लिए मकान की राशि से अलग सहायता जुड़ती है।

0 टिप्पणियाँ