Offbeat Places in India 2026: गोवा-मनाली छोड़िए, परिवार के साथ घूमें ये 5 शांत और सस्ती जगहें

. Offbeat Places in India: गोवा-मनाली की भीड़ से दूर परिवार के साथ घूम आएं ये 5 शांत जगहें

Offbeat Places in India: गोवा-मनाली की भीड़ से दूर परिवार के साथ घूम आएं ये 5 शांत जगहें, मिलेगा अलग अनुभव

घूमने का प्लान बनते ही अक्सर सबसे पहले गोवा, मनाली, शिमला या मसूरी का नाम सामने आता है। इन जगहों की अपनी अलग पहचान है, लेकिन छुट्टियों के मौसम में यहां इतनी भीड़ हो जाती है कि कई बार सफर का आधा वक्त ट्रैफिक, होटल की वेटिंग और लोगों की भीड़ के बीच निकल जाता है। ऐसे में बहुत से लोग अब ऐसी जगहों की तलाश करते हैं जहां कुछ दिन आराम से बिताए जा सकें और बिना भागदौड़ के आसपास की खूबसूरती को महसूस किया जा सके।

भारत के अलग-अलग हिस्सों में आज भी कई ऐसे इलाके मौजूद हैं जो बड़े पर्यटन स्थलों जितने चर्चित नहीं हैं, लेकिन प्राकृतिक सुंदरता के मामले में किसी से कम भी नहीं हैं। कहीं ऊंचे पहाड़ बादलों से बातें करते दिखाई देते हैं, कहीं नदी के बीच बसा शांत गांव अलग दुनिया का एहसास कराता है, तो कहीं समुद्र किनारे बिना शोर-शराबे के घंटों बैठा जा सकता है।

इन जगहों पर पहुंचने के बाद सबसे पहले जिस चीज का फर्क महसूस होता है, वह है माहौल। सुबह जल्दी निकलने पर सड़कें खाली मिलती हैं, हवा में ठंडक रहती है और आसपास का वातावरण धीरे-धीरे जागता हुआ दिखाई देता है। स्थानीय लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त रहते हैं और पर्यटकों की भीड़ कम होने की वजह से हर जगह आराम से समय बिताया जा सकता है।

तवांग तवांग
चोपता चोपता
माजुली माजुली
खज्जियार खज्जियार
गोकर्ण गोकर्ण

1. तवांग, अरुणाचल प्रदेश — पहाड़ों के बीच बसी शांत दुनिया

अरुणाचल प्रदेश का तवांग उन जगहों में गिना जाता है जहां पहुंचते ही आसपास का पूरा माहौल बदलता हुआ महसूस होने लगता है। यहां की सड़कें पहाड़ों के बीच से गुजरती हैं और सफर के दौरान कई ऐसे मोड़ आते हैं जहां लोग कुछ देर रुककर सिर्फ सामने फैले नजारों को देखते रह जाते हैं। दूर तक दिखाई देने वाली बर्फ से ढकी चोटियां, बीच-बीच में उतरते बादल और ठंडी हवा पूरे रास्ते को यादगार बना देती है।

तवांग की पहचान सिर्फ खूबसूरत पहाड़ नहीं हैं। यहां का मशहूर बौद्ध मठ भी बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींचता है। सुबह के समय यहां का माहौल बिल्कुल अलग दिखाई देता है। चारों तरफ शांति रहती है और पहाड़ों से आती ठंडी हवा पूरे वातावरण को और भी सुकून भरा बना देती है...

तवांग का मौसम साल के अलग-अलग महीनों में अलग रंग दिखाता है। मार्च से जून के बीच पहाड़ों पर हरियाली और साफ मौसम देखने को मिलता है, जबकि सितंबर और अक्टूबर में आसमान ज्यादा साफ रहने की वजह से दूर तक फैली चोटियां साफ दिखाई देती हैं। सर्दियों में बर्फबारी भी होती है, इसलिए उस समय आने वाले लोग पहले से तैयारी करके पहुंचते हैं।

यहां का सेला पास तवांग की सबसे चर्चित जगहों में गिना जाता है। समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर मौजूद यह दर्रा पूरे साल पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। रास्ते में छोटी-बड़ी झीलें, घुमावदार सड़कें और बदलता मौसम सफर को और दिलचस्प बना देते हैं। कई बार कुछ ही मिनटों में धूप और बादल दोनों देखने को मिल जाते हैं।

तवांग का स्थानीय बाजार बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन यहां घूमते हुए अरुणाचल की संस्कृति की झलक आसानी से दिखाई देती है। ऊनी कपड़े, हाथ से बनी छोटी-छोटी चीजें और स्थानीय खाने की दुकानें बाजार को अलग पहचान देती हैं। शाम के समय यहां ज्यादा शोर नहीं होता, इसलिए आराम से टहलते हुए पूरा इलाका देखा जा सकता है।

घूमने का बेहतर समय: मार्च से जून और सितंबर से अक्टूबर।

2. चोपता, उत्तराखंड — जहां सुबह की हवा भी अलग एहसास छोड़ जाती है

उत्तराखंड में घूमने की बात होती है तो ज्यादातर लोग मसूरी, नैनीताल या औली का नाम लेते हैं, लेकिन चोपता आज भी उन जगहों में शामिल है जहां भीड़ बाकी पहाड़ी इलाकों के मुकाबले कम दिखाई देती है। यही वजह है कि यहां पहुंचने वाले लोग सबसे पहले यहां की शांति को महसूस करते हैं।

चोपता चारों तरफ फैले देवदार और बुरांश के जंगलों के बीच बसा है। सड़क के दोनों तरफ ऊंचे-ऊंचे पेड़, दूर तक फैले घास के मैदान और सामने दिखाई देती हिमालय की चोटियां पूरे इलाके को अलग पहचान देती हैं। सुबह के समय हल्का कोहरा और ठंडी हवा यहां के माहौल को और खूबसूरत बना देते हैं।

यहां आने वाले कई लोग सुबह जल्दी निकलकर आसपास के रास्तों पर पैदल घूमना पसंद करते हैं। रास्ते में छोटे-छोटे पहाड़ी गांव दिखाई देते हैं, जहां लोग अपने रोजमर्रा के काम में लगे रहते हैं। कहीं खेतों में काम होता नजर आता है तो कहीं घरों के बाहर लकड़ी जमा करते लोग दिखाई देते हैं। इसी वजह से यहां सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि पहाड़ों की असली जिंदगी भी करीब से देखने का मौका मिलता है।

चोपता से तुंगनाथ मंदिर जाने वाला रास्ता काफी मशहूर है। यह ट्रैक बहुत लंबा नहीं है, इसलिए अलग-अलग उम्र के लोग भी आराम से तय कर लेते हैं। रास्ते भर बदलते नजारे सफर को लगातार रोचक बनाए रखते हैं। कहीं पहाड़ों के ऊपर बादल टिके दिखाई देते हैं तो कहीं अचानक पूरी घाटी साफ नजर आने लगती है।

दोपहर के समय यहां का मौसम अक्सर साफ रहता है। खुले मैदानों में बैठकर आसपास के पहाड़ों को देखना अपने आप में अलग अनुभव माना जाता है। शाम होते-होते तापमान तेजी से गिरने लगता है और ठंडी हवा पूरे इलाके में फैल जाती है।

घूमने का बेहतर समय: अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर।

3. माजुली, असम — ब्रह्मपुत्र के बीच बसा सादगी भरा द्वीप

असम का माजुली उन जगहों में शामिल है जहां पहुंचने के बाद सबसे पहले शहर की भागदौड़ पीछे छूटती हुई महसूस होती है। ब्रह्मपुत्र नदी के बीच बसा यह द्वीप अपनी शांत जिंदगी, हरियाली और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है। यहां तक पहुंचने के लिए फेरी का सहारा लेना पड़ता है और सफर का यही हिस्सा कई लोगों के लिए सबसे यादगार बन जाता है।

फेरी धीरे-धीरे नदी के पानी को चीरते हुए आगे बढ़ती है। चारों तरफ फैला पानी, दूर दिखाई देते छोटे-छोटे गांव और किनारे पर खड़ी नावें पूरे रास्ते का नजारा बदलते रहते हैं। जैसे-जैसे माजुली करीब आता है, वैसे-वैसे माहौल भी बदलता नजर आता है। यहां तेज रफ्तार ट्रैफिक या शहरों जैसा शोर नहीं मिलता।

द्वीप के अंदर पहुंचने पर मिट्टी के घर, बांस से बने आंगन, खुले खेत और कच्ची सड़कें यहां की पहचान बनकर सामने आती हैं। कई घरों के बाहर केले, सुपारी और नारियल के पेड़ दिखाई देते हैं। सुबह के समय गांवों में लोग अपने रोजमर्रा के काम में लग जाते हैं। कोई खेत की तरफ निकलता है तो कोई नदी किनारे जाल लेकर पहुंच जाता है।

माजुली अपने सत्रों के लिए भी जाना जाता है। ये सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि असम की पुरानी कला, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को आज भी संभालकर रखे हुए हैं। कई जगहों पर पारंपरिक मुखौटे बनाने का काम भी देखने को मिलता है। लकड़ी और मिट्टी से तैयार किए जाने वाले ये मुखौटे यहां की सांस्कृतिक पहचान माने जाते हैं।

शाम के समय ब्रह्मपुत्र का किनारा बिल्कुल अलग रूप में दिखाई देता है। धीरे-धीरे ढलता सूरज, नदी के ऊपर बदलते रंग और दूर लौटती नावें पूरे माहौल को शांत बना देती हैं। यहां कुछ देर बैठने पर आसपास सिर्फ नदी की आवाज सुनाई देती है।

घूमने का बेहतर समय: अक्टूबर से मार्च।

4. खज्जियार, हिमाचल प्रदेश — हरे मैदान और देवदार के जंगलों का खूबसूरत मेल

हिमाचल प्रदेश का खज्जियार लंबे समय से अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। हालांकि इसका नाम काफी लोग जानते हैं, लेकिन यहां मनाली जैसी भारी भीड़ हर मौसम में देखने को नहीं मिलती। इसी वजह से परिवार के साथ आने वाले लोग यहां आराम से पूरा दिन बिता लेते हैं।

खज्जियार की सबसे बड़ी पहचान इसका बड़ा हरा मैदान है। मैदान के बीच छोटी-सी झील और चारों तरफ खड़े देवदार के ऊंचे पेड़ पूरे इलाके को अलग रूप देते हैं। मौसम साफ रहने पर दूर तक फैली पहाड़ियां भी दिखाई देती हैं।

सुबह के समय मैदान पर हल्की धूप पड़ती है तो पूरा इलाका सुनहरे रंग में नजर आने लगता है। वहीं शाम ढलने के बाद ठंडी हवा चलने लगती है और देवदार के पेड़ों के बीच का माहौल बिल्कुल शांत हो जाता है। कई परिवार यहां घंटों बैठकर आसपास के नजारों का आनंद लेते दिखाई देते हैं।

खज्जियार के आसपास घुड़सवारी और खुले मैदान में घूमने का भी मौका मिलता है। बच्चों के लिए खुली जगह होने की वजह से वे आराम से खेल सकते हैं। फोटोग्राफी पसंद करने वाले लोगों के लिए भी यहां अलग-अलग मौसम में अलग दृश्य देखने को मिलते हैं। बरसात के बाद मैदान और ज्यादा हरा दिखाई देता है, जबकि गर्मियों में मौसम सुहावना बना रहता है।

डलहौजी यहां से ज्यादा दूर नहीं है। इसलिए कई लोग एक ही सफर में दोनों जगहों को शामिल करते हैं। दोनों जगहों के बीच का पहाड़ी रास्ता भी अपने सुंदर दृश्यों के लिए जाना जाता है।

घूमने का बेहतर समय: मार्च से जून।

5. गोकर्ण, कर्नाटक — समुद्र का किनारा, लेकिन बिना भागदौड़ वाला माहौल

समुद्र किनारे छुट्टियां बिताने की बात हो तो सबसे पहले गोवा का नाम सामने आता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ती भीड़ की वजह से कई लोग अब ऐसे समुद्री इलाकों की तलाश करते हैं जहां आराम से समय बिताया जा सके। कर्नाटक का गोकर्ण ऐसी ही जगहों में गिना जाता है। यहां का माहौल गोवा के मुकाबले काफी शांत दिखाई देता है और समुद्र तटों पर भीड़ भी अपेक्षाकृत कम रहती है।

गोकर्ण पहुंचते ही सबसे पहले समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देती है। सुबह के समय बीच पर स्थानीय मछुआरे अपनी नावों के साथ दिखाई देते हैं। कुछ लोग टहलते नजर आते हैं तो कुछ किनारे बैठकर समुद्र को निहारते रहते हैं। यहां तेज संगीत और भीड़भाड़ वाला माहौल कम देखने को मिलता है।

ओम बीच गोकर्ण की सबसे चर्चित जगहों में शामिल है। ऊपर से देखने पर इसका आकार 'ॐ' जैसा दिखाई देता है, इसी वजह सेइसे यह नाम मिला। साफ रेत, नीला समुद्र और आसपास की पहाड़ियां इस बीच को अलग पहचान देती हैं। सुबह और शाम के समय यहां का नजारा सबसे ज्यादा आकर्षक दिखाई देता है।

कुडले बीच भी गोकर्ण आने वाले लोगों के बीच काफी पसंद किया जाता है। यहां पहुंचने के लिए थोड़ा पैदल चलना पड़ता है, लेकिन रास्ते में दिखाई देने वाले समुद्री दृश्य सफर को यादगार बना देते हैं। शाम ढलने के समय आसमान का बदलता रंग और किनारे से टकराती लहरें लंबे समय तक याद रहती हैं।

अगर समय हो तो हाफ मून बीच और पैराडाइज बीच भी देखा जा सकता है। ये दोनों समुद्र तट अपेक्षाकृत शांत माने जाते हैं। यहां आसपास ज्यादा निर्माण नहीं हुआ है, इसलिए प्राकृतिक वातावरण अब भी काफी हद तक वैसा ही दिखाई देता है जैसा वर्षों पहले था।

गोकर्ण सिर्फ समुद्र तटों की वजह से ही नहीं जाना जाता। यहां का महाबलेश्वर मंदिर भी काफी पुराना माना जाता है। मंदिर के आसपास की गलियों में स्थानीय दुकानें,छोटे भोजनालय और पारंपरिक बाजार दिखाई देते हैं। यहां स्थानीय खाने का स्वाद भी अलग अनुभव देता है।

सुबह के समय समुद्र किनारे हल्की हवा चलती रहती है, जबकि शाम को डूबते सूरज का नजारा देखने के लिए लोग अलग-अलग बीच पर पहुंचते हैं। मौसम साफ रहने पर समुद्र के ऊपर बदलते रंग पूरे वातावरण को और आकर्षक बना देते हैं।

बरसात के बाद आसपास की पहाड़ियां हरियाली से भर जाती हैं। वहीं अक्टूबर से मार्च के बीच मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहता है। इसी दौरान सबसे ज्यादा पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

घूमने का बेहतर समय: अक्टूबर से मार्च।

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