महानंदा में 55 सेमी और कोसी में 10 सेमी जलस्तर बढ़ा, कटिहार समेत कई जिलों में अलर्ट

 

महानंदा में 55 सेंटीमीटर, कोसी में 10 सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ा, उत्तर बिहार की नदियों पर बढ़ी चौकसी

महानंदा और कोसी नदी का बढ़ता जलस्तर, कटिहार में नदी किनारे निगरानी करते लोग


कटिहार। उत्तर बिहार में लगातार हो रही बारिश का असर अब नदियों के जलस्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। जल संसाधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले 12 घंटे के दौरान महानंदा नदी के जलस्तर में 55 सेंटीमीटर और कोसी नदी में 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फिलहाल सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन अचानक हुई इस बढ़ोतरी के बाद प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। अलग-अलग गेज स्टेशनों से हर कुछ घंटे पर जलस्तर की रिपोर्ट ली जा रही है ताकि स्थिति में किसी भी बदलाव का तुरंत पता चल सके।

विभाग के अधिकारियों के मुताबिक महानंदा नदी के कई मापन केंद्रों पर पानी बढ़ा है। झावा गेज स्टेशन पर सबसे अधिक 55 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा रामायणपुर में 20 सेंटीमीटर और गोविंदपुर में 10 सेंटीमीटर जलस्तर ऊपर गया है। धबौल, दुर्गापुर और अन्य मापन केंद्रों से भी बढ़ते जलस्तर की सूचना मिली है। हालांकि सभी स्थानों पर नदी अभी सुरक्षित सीमा के भीतर बह रही है।

महानंदा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। इन जिलों में हर साल बरसात के दौरान नदी के बहाव में बदलाव का सीधा असर निचले इलाकों पर पड़ता है। इसी वजह से जिला प्रशासन ने स्थानीय अधिकारियों से नियमित रिपोर्ट मांगी है।

उधर कोसी नदी में भी जलस्तर बढ़ने के बाद सुपौल, सहरसा और मधेपुरा जिलों में निगरानी तेज कर दी गई है। कोसी का जलस्तर भले ही इस बार केवल 10 सेंटीमीटर बढ़ा हो, लेकिन इस नदी के बहाव में छोटे बदलाव को भी गंभीरता से लिया जाता है। विभाग का कहना है कि नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और फिलहाल किसी तरह की आपात स्थिति नहीं है।

जल संसाधन विभाग के अभियंता लगातार गेज स्टेशनों से आंकड़े एकत्र कर रहे हैं। इन आंकड़ों के आधार पर हर कुछ घंटे में नई रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट जिला नियंत्रण कक्ष और संबंधित अधिकारियों को भेजी जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते निर्णय लिया जा सके। फिलहाल किसी इलाके से बड़े पैमाने पर जलभराव या आबादी के प्रभावित होने की सूचना नहीं मिली है।

इस बीच कटिहार जिले के बरसोई प्रखंड में नागर नदी के किनारे कटाव की समस्या सामने आई है। खोजा से उदयपुर जाने वाली ग्रामीण सड़क के पास नदी लगातार मिट्टी काट रही है। सड़क और नदी के बीच की दूरी कम होने से स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ी है। यदि कटाव इसी रफ्तार से जारी रहा तो आने वाले दिनों में सड़क को नुकसान पहुंच सकता है। इस मार्ग का इस्तेमाल आसपास के कई गांवों के लोग रोजाना करते हैं, इसलिए प्रशासन ने इस हिस्से पर भी नजर रखने के निर्देश दिए हैं।

बरसोई क्षेत्र से मिली रिपोर्ट के अनुसार कटाव वाले स्थानों का निरीक्षण करने की तैयारी की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर बचाव कार्य शुरू किया जाएगा। जल संसाधन विभाग का कहना है कि जहां भी कटाव तेजी से बढ़ता दिखाई देगा, वहां तत्काल कार्रवाई की जाएगी ताकि सड़क और आसपास की जमीन को सुरक्षित रखा जा सके।

मौसम विभाग ने उत्तर बिहार के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश की संभावना जताई है। इसी वजह से प्रशासन ने जलस्तर की निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि अभी घबराने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन मौसम में बदलाव के साथ नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसलिए सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

महानंदा और कोसी के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन सतर्क, कटाव वाले इलाकों पर विशेष निगरानी

महानंदा और कोसी नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद जिला प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण से जुड़े सभी विभागों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। जल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है। सभी गेज स्टेशनों से मिलने वाली रिपोर्ट का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि जलस्तर में अचानक बदलाव होने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।


कटिहार जिले के साथ-साथ पूर्णिया और किशनगंज के उन इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है, जहां हर वर्ष बरसात के दौरान नदी का बहाव बढ़ने से परेशानी होती है। अधिकारियों को तटबंधों का नियमित निरीक्षण करने और किसी भी तरह की क्षति की सूचना तत्काल जिला मुख्यालय भेजने को कहा गया है। फिलहाल कहीं से तटबंध टूटने या बड़े पैमाने पर जलभराव की सूचना नहीं मिली है।


बरसोई प्रखंड में नागर नदी के किनारे हो रहे कटाव को लेकर भी प्रशासन सक्रिय हुआ है। खोजा-उदयपुर सड़क के आसपास प्रभावित हिस्से का निरीक्षण कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संबंधित विभाग को कटाव की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। अगर बहाव तेज होने से सड़क को खतरा बढ़ता है तो तत्काल अस्थायी सुरक्षा कार्य शुरू किया जाएगा, ताकि आवागमन प्रभावित न हो।


जल संसाधन विभाग का कहना है कि बरसात के मौसम में कई छोटी नदियों और सहायक धाराओं का जलस्तर भी तेजी से बदलता है। इसलिए केवल बड़ी नदियों पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी निगरानी रखी जा रही है। अभियंताओं की टीम अलग-अलग स्थानों से लगातार जानकारी जुटा रही है और सभी रिपोर्ट जिला नियंत्रण कक्ष तक पहुंचाई जा रही हैं।


मौसम विभाग ने उत्तर बिहार के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। यदि नेपाल के तराई क्षेत्र और ऊपरी जलग्रहण इलाके में अधिक वर्षा होती है तो उसका असर बिहार की नदियों पर भी दिखाई दे सकता है। इसी संभावना को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती तैयारी बनाए रखी है।


आपदा प्रबंधन विभाग ने स्थानीय अधिकारियों से कहा है कि संवेदनशील गांवों की स्थिति पर नियमित नजर रखें। यदि किसी इलाके में पानी फैलने की आशंका बनती है तो लोगों को समय रहते सूचना दी जाए। साथ ही नाव, राहत सामग्री और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर राहत कार्य में देरी न हो।


प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि नदी किनारे अनावश्यक आवाजाही न करें और जलस्तर से जुड़ी जानकारी केवल सरकारी स्रोतों से ही प्राप्त करें। सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा नहीं करने की सलाह भी दी गई है। किसी भी आपात स्थिति में जिला नियंत्रण कक्ष या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने को कहा गया है।


फिलहाल सबसे राहत की बात यह है कि महानंदा, कोसी और जिले की अन्य प्रमुख नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। इसके बावजूद पिछले 12 घंटे में दर्ज हुई बढ़ोतरी को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने चौबीसों घंटे निगरानी जारी रखी है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और जलस्तर के आधार पर आगे के निर्णय लिए जाएंगे।


बरसात का मौसम अभी जारी है। ऐसे में प्रशासन की कोशिश है कि जलस्तर से जुड़ी हर जानकारी समय पर लोगों तक पहुंचे और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए सभी विभाग पूरी तरह तैयार रहें। फिलहाल हालात सामान्य हैं, लेकिन निगरानी और सतर्कता पहले से अधिक बढ़ा दी गई हैं।

नेपाल की बारिश का असर, क्यों अचानक बदल जाता है उत्तर बिहार का हाल

उत्तर बिहार की अधिकांश बड़ी नदियों का स्रोत नेपाल के पहाड़ी इलाके हैं। इसलिए बिहार में बारिश कम होने के बावजूद कई बार नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है। जल विशेषज्ञ बताते हैं कि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार वर्षा होने पर उसका पानी कुछ घंटों बाद बिहार की नदियों तक पहुंचता है। इसी वजह से जल संसाधन विभाग केवल स्थानीय वर्षा नहीं, बल्कि नेपाल के मौसम और वहां के नदी प्रवाह पर भी लगातार नजर रखता है।


महानंदा और कोसी का स्वभाव एक-दूसरे से अलग माना जाता है। महानंदा सीमांचल के जिलों से गुजरते हुए आगे बढ़ती है, जबकि कोसी का प्रभाव पूर्वी बिहार के बड़े हिस्से तक दिखाई देता है। दोनों नदियों में जलस्तर बढ़ने का समय और गति अलग हो सकती हैं। इसी कारण हर नदी के लिए अलग निगरानी व्यवस्था बनाई गई है और अलग-अलग गेज स्टेशनों से आंकड़े लिए जाते हैं।


बाढ़ प्रबंधन के दौरान जिला प्रशासन केवल नदी का जलस्तर नहीं देखता। नदी में बहने वाले पानी की मात्रा, बहाव की रफ्तार और तटबंधों की स्थिति भी लगातार दर्ज की जाती है। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर यह तय होता है कि किन इलाकों में अतिरिक्त निगरानी की जरूरत है और कहां अधिकारियों की टीम भेजी जानी चाहिए।


इस समय जल संसाधन विभाग के कंट्रोल रूम में चौबीस घंटे निगरानी जारी है। गेज स्टेशनों से आने वाली जानकारी का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है ताकि किसी भी असामान्य बदलाव का तुरंत पता चल सके। आवश्यकता पड़ने पर यही रिपोर्ट जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और राज्य मुख्यालय को भेजी जाती है।


बाढ़ के मौसम में ग्रामीण सड़कों, छोटे पुलों और पुलियों पर भी विशेष नजर रखी जाती है। कई बार नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे रहता है, लेकिन तेज बहाव के कारण संपर्क मार्ग प्रभावित होने लगते हैं। इसलिए लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग को भी संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।


प्रशासन ने मछुआरों और नाव चालकों से भी अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा है। तेज बहाव वाले हिस्सों में नाव चलाने से बचने और नदी में अनावश्यक प्रवेश नहीं करने की सलाह दी गई है। इसी तरह किसानों से भी अपील की गई है कि वे नदी के बिल्कुल किनारे वाले खेतों में काम करते समय मौसम और जलस्तर की जानकारी पर नजर रखें।


फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान निगरानी, समन्वय और समय पर सूचना उपलब्ध कराने पर है। आने वाले दिनों में वर्षा की स्थिति और नेपाल से आने वाले पानी के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि जलस्तर सामान्य बना रहता है तो स्थिति नियंत्रण में रहेगी, लेकिन मौसम में बड़े बदलाव की स्थिति में विभाग अपनी अगली कार्ययोजना उसी के अनुसार लागू करेगा।

राहत की तैयारी के साथ निगरानी भी तेज, विभागों को दिए गए अलग-अलग जिम्मे

जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद जिला प्रशासन ने अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी तय कर दी है। जल संसाधन विभाग नदी की स्थिति पर नजर रख रहा है, जबकि आपदा प्रबंधन विभाग संभावित जरूरतों का आकलन कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक दवाओं का भंडार तैयार रखने के लिए कहा गया है। पशुपालन विभाग को भी उन इलाकों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है, जहां आवश्यकता पड़ने पर पशुओं के लिए चारा और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करानी पड़ सकती है।


प्रखंड और अंचल स्तर के अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने क्षेत्र की नियमित रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजें। जिन पंचायतों में पहले बाढ़ या कटाव की समस्या रही है, वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया है कि किसी भी बदलाव की जानकारी मिलने पर बिना देरी किए नियंत्रण कक्ष को सूचित करें।


बाढ़ नियंत्रण से जुड़े उपकरणों और संसाधनों की भी समीक्षा की जा रही है। जिन स्थानों पर नावों की जरूरत पड़ सकती है, वहां उनकी उपलब्धता की जानकारी ली गई है। राहत सामग्री के भंडारण वाले केंद्रों की भी जांच की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर वितरण में समय न लगे। प्रशासन का कहना है कि अभी इन संसाधनों का इस्तेमाल करने की स्थिति नहीं बनी है, लेकिन पहले से तैयारी रखना जरूरी है।


ग्रामीण इलाकों में बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी नजर रखी जा रही है। कई बार लगातार बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है, इसलिए संबंधित विभागों को संभावित शिकायतों के लिए तैयार रहने को कहा गया है। पेयजल योजनाओं की निगरानी भी बढ़ाई गई है ताकि किसी स्थान पर जलापूर्ति बाधित होने पर तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके।


रेल और सड़क संपर्क पर भी प्रशासन की नजर बनी हुई है। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के साथ-साथ ग्रामीण सड़कों की स्थिति की जानकारी संबंधित विभागों से ली जा रही है। यदि किसी स्थान पर जलभराव या कटाव के कारण आवागमन प्रभावित होता है तो उसके अनुसार यातायात व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा।


फिलहाल प्रशासन का कहना है कि स्थिति सामान्य है और किसी प्रकार की घबराहट की जरूरत नहीं है। हालांकि बरसात का दौर अभी जारी है, इसलिए अगले कुछ दिनों तक जलस्तर की निगरानी पहले की तरह लगातार जारी रहेगी। विभागों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किसी भी परिस्थिति में सूचना के आदान-प्रदान में देरी नहीं होनी चाहिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल निर्णय लिया जा सके।

जलस्तर की निगरानी कैसे होती है और रिपोर्ट किस तरह तैयार की जाती है

नदी का जलस्तर बढ़ने या घटने की जानकारी अनुमान के आधार पर नहीं दी जाती। इसके लिए जल संसाधन विभाग ने अलग-अलग स्थानों पर गेज स्टेशन स्थापित किए हैं। इन केंद्रों पर नियमित अंतराल पर माप लिया जाता है और उसी आधार पर आधिकारिक रिपोर्ट तैयार होती है। यही आंकड़े जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और राज्य मुख्यालय तक पहुंचाए जाते हैं।


हर गेज स्टेशन की अपनी अलग भूमिका होती है। किसी स्थान पर जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो दूसरे स्थान पर उसका असर कुछ घंटे बाद दिखाई देता है। इसलिए विभाग एक जगह के आंकड़ों के आधार पर फैसला नहीं लेता। सभी केंद्रों से मिली जानकारी का मिलान करने के बाद ही स्थिति का आकलन किया जाता है।


जलस्तर के साथ नदी के बहाव की गति पर भी नजर रखी जाती है। कई बार पानी की मात्रा बहुत अधिक नहीं होती, लेकिन बहाव तेज होने से कटाव बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में अभियंताओं की टीम संबंधित इलाके का निरीक्षण करती है और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा कार्य की सिफारिश करती है। इससे संभावित नुकसान को समय रहते कम करने की कोशिश की जाती है।


बाढ़ नियंत्रण कक्ष में चौबीस घंटे अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। यहां से मिलने वाली हर नई सूचना दर्ज की जाती है। यदि किसी गेज स्टेशन पर अचानक जलस्तर बढ़ता है तो संबंधित जिले के अधिकारियों को तुरंत जानकारी भेजी जाती है। इसी व्यवस्था के कारण प्रशासन को समय रहते आवश्यक तैयारी का अवसर मिल जाता है।


फिलहाल महानंदा, कोसी और अन्य प्रमुख नदियों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग का कहना है कि मौसम और जलस्तर में होने वाले बदलाव के अनुसार आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। लोगों से भी अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें और किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी से बचें। इससे सही समय पर सही निर्णय लेने में प्रशासन और आम लोगों दोनों को सुविधा होगी।

 आगे किन बातों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर

अगले कुछ दिन जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन के लिए अहम माने जा रहे हैं। मौसम की स्थिति, नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में होने वाली बारिश और नदियों के बहाव में बदलाव—इन तीनों बिंदुओं के आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। विभाग का मानना है कि जलस्तर का लगातार रिकॉर्ड तैयार करना जरूरी है, क्योंकि इसी से यह पता चलता है कि नदी सामान्य गति से बढ़ रही है या अचानक बदलाव हो रहा है।


कटिहार समेत सीमांचल के जिलों में प्रशासन ने सभी संबंधित कार्यालयों को नियमित सूचना साझा करने के निर्देश दिए हैं। किसी भी प्रखंड से अगर जलभराव, कटाव या संपर्क मार्ग प्रभावित होने की सूचना मिलती है तो उसकी पुष्टि के बाद तत्काल आवश्यक विभाग को कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा। इससे अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखने में आसानी होगी।


बरसात के मौसम में नदी के साथ छोटी धाराओं और बरसाती नालों की भी निगरानी की जाती है। कई बार मुख्य नदी सुरक्षित सीमा में रहती है, लेकिन सहायक जलधाराओं में पानी बढ़ने से स्थानीय स्तर पर परेशानी पैदा हो जाती है। इसी कारण प्रशासन ने केवल प्रमुख नदियों तक निगरानी सीमित नहीं रखी है।


स्वास्थ्य विभाग को भी आवश्यक दवाओं और प्राथमिक चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। वहीं पेयजल आपूर्ति से जुड़े विभागों को निर्देश दिया गया है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की तैयारी बनाए रखें। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए बिजली विभाग की टीमें भी अलर्ट पर रखी गई हैं।


फिलहाल महानंदा और कोसी दोनों नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। प्रशासन का कहना है कि मौजूदा स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन निगरानी लगातार जारी रहेगी। मौसम में बदलाव या जलस्तर में असामान्य वृद्धि होने पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। लोगों से अपील की गई है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। इससे किसी भी संभावित स्थिति का समय रहते सामना किया जा सकेगा।


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